संकष्टी चतुर्थी व्रत — महत्व, विधि और लाभ
संकष्टी चतुर्थी व्रत — महत्व और विधि
संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित व्रत है, जो हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी रखा जाता है। यह व्रत विघ्न-नाश, बुद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है।
श्रद्धा और नियम से किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल लाता है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
संकष्टी चतुर्थी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व है — यह विघ्न-नाश, बुद्धि और मनोकामना पूर्ति प्रदान करने वाला माना जाता है। भगवान गणेश की कृपा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
संकष्टी चतुर्थी व्रत की विधि
गणेश जी की पूजा करें, चंद्रोदय पर अर्घ्य देकर व्रत खोलें। व्रत के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर संकल्प लें, दिनभर श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ करें और शाम को व्रत कथा सुनकर विधि अनुसार व्रत खोलें।
व्रत के नियम
- सूर्योदय से पहले स्नान कर संकल्प लें
- मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें
- क्रोध, झूठ और तामसिक भोजन से बचें
- व्रत कथा सुनें और दान-पुण्य करें
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Frequently Asked Questions
संकष्टी चतुर्थी व्रत कब रखा जाता है?
संकष्टी चतुर्थी व्रत हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी रखा जाता है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत किस देवता को समर्पित है?
संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने से क्या लाभ होता है?
संकष्टी चतुर्थी व्रत से विघ्न-नाश, बुद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्राप्ति मानी जाती है।